दोस्तों के साथ तुम्हारी क्लास के बाहर से निकलते वक्त जब उस दरवाजे की सुराख से तुम पर नजर पड़ी तो ऐसा लगा जैसे साक्षात चांद धरती पर उतर आया हो। अपलक देखता ही रह गया था... बस बिना कुछ ख्याल किये किताबों में खोई उस मानक सौन्दर्य मूर्ति की तरफ बढ़ता चला गया। यह भी ध्यान नहीं रहा कि स्कूल के सबसे ज्यादा गुस्सैल शिक्षक क्लास में थे।
फासला कम होता गया, सम्मोहन बढ़ता गया। पास पहुंचने तक हमारे मध्य स्मित अवलंबित नजर सेतु स्थापित हो चुका था, भावनाओं का परिवहन होने लगा, साथ ही उमड़ पड़ा था अनुशासनहीनता पर गुस्से का एक सैलाब...
अगले ही पल मैं तो क्लास से बाहर था लेकिन मेरी आंखों में तुम थी... आज भी लोग आंखों के एक कोने में तुम्हें खोजते हैं... कभी तुम मिलती हो तो कभी तुम्हारे साथ बिताए गए उन हसीन लम्हों का खुशनुमा अहसास... लेकिन रात के अंधेरे में तुम्हारे अकल्पित प्रतिमानों से दूर बहती अश्रुधारा को कोई न देख पाया...
उन आंसुओं ने जीवन को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया जहां से मुझे अपना भविष्य तय करना था। पहले बिजनस मैनेजमेंट की पढ़ाई छोड़ी और फिर इंजीनियरिंग की... 3 सालों तक उस घनघोर अंधेरे में खुद की पहचान खोजता रहा। और फिर सब ईश्वर पर छोड़ दिया... पता नहीं मैं कितना सफल हुआ लेकिन जिस गौरव त्रिपाठी ने खुद को ईश्वर के भरोसे छोड़ा था, वह अब विश्व गौरव बन चुका है पर तुम्हें खोकर खुद को पाने की टीस आज भी रात के अंधेरों में आंखों के रास्ते बाहर आ ही जाती है...
#क्वीन
'क्वीन' कौन है? इस सवाल का जवाब तो मैं भी खोज रहा हूं। मैं तो बस इतना जानता हूं कि यह सामान्य को विशिष्ट बनाने का एक प्रयास है... कोई अलंकार नहीं... सिर्फ सच्ची भावनाएं... तुम थी तो सब कुछ था... तुम नहीं हो तो भी सब कुछ है....लेकिन तब वह 'सब कुछ' अच्छा लगता था लेकिन अब.... #क्वीन
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Wednesday, June 7, 2017
नई क्लास का वह तीसरा दिन...
नई क्लास का तीसरा दिन था वह... जब पहली बार तुम्हें देखा था। देखा तो क्या था, बस यूं समझो कि तुममें खुद को खोकर बदहवास सा हो गया था। 2 मिनट के बाद पूरी क्लास की नजरें मुझ पर थीं और मेरी तुम पर। सादगी और लालिमा का अद्भुत मेल दिख रहा था तुम्हारे चेहरे पर। पता है, आज भी जब तुम्हें सोचता हूं तो तुम्हारा चेहरा उसी रूप में मेरी आंखों के सामने आ जाता है...
लोग कहते हैं कि यादें हमेशा होंठों पर मुस्कान ले आती हैं मगर मेरा मानना है कि यादें, यदि मुस्कान लाती हैं तो उस के साथ-साथ उस पल के बीत जाने का ग़म भी साथ लाती हैं जिस पल ने उन्हें यादें बना दिया। यादें, जिसमें न जानें कितनी गहराई छुपी हुई है। यादें, जो खट्टी भी होती हैं और मीठी भी। कोई साथ निभाये या ना निभाये, मगर हमेशा साथ निभाती हैं, ये यादें।
कई बार ऐसा भी होता है कि आप अपने जीवन में कुछ यादों से भागना चाहते हैं, लेकिन चांद पर लगे दाग की तरह ये हमेशा साथ रहती हैं। न जाने कितने जज़्बातों का समंदर होती हैं ये यादें, जिसमें यह दिल की कश्ती डूबती, संभालती बस दिनकर के नियमित जीवन की तरह चलती ही चली जाती है।
तुम्हारे साथ बिताए गए बेहद खास और हसीन लम्हों की यादों के अलावा मेरे पास कुछ ऐसी यादें भी हैं जिन्हें मैं याद नहीं रखना चाहता लेकिन क्या करूं यादें हैं ना, भूल भी नहीं सकता। इन यादों के पीछे का सच मुझे जीने नहीं देता, पल-पल, हर पल वे यादें तुम्हें मुझसे दूर जाकर किसी और के आगोश में होने का अहसास कराती हैं। अफसोस, मुझे इस सच के साथ ही जीना होगा लेकिन एक सच ऐसा भी है जिसे मैं अपने साथ लेकर नहीं जी सकता और इसलिए उस सच को झूठ में बदल दूंगा। तुम मेरी न हुई तो क्या हुआ लोग तुम्हें मेरे नाम से ही जानेंगे। क्वीन... गौरव की #क्वीन
लोग कहते हैं कि यादें हमेशा होंठों पर मुस्कान ले आती हैं मगर मेरा मानना है कि यादें, यदि मुस्कान लाती हैं तो उस के साथ-साथ उस पल के बीत जाने का ग़म भी साथ लाती हैं जिस पल ने उन्हें यादें बना दिया। यादें, जिसमें न जानें कितनी गहराई छुपी हुई है। यादें, जो खट्टी भी होती हैं और मीठी भी। कोई साथ निभाये या ना निभाये, मगर हमेशा साथ निभाती हैं, ये यादें।
कई बार ऐसा भी होता है कि आप अपने जीवन में कुछ यादों से भागना चाहते हैं, लेकिन चांद पर लगे दाग की तरह ये हमेशा साथ रहती हैं। न जाने कितने जज़्बातों का समंदर होती हैं ये यादें, जिसमें यह दिल की कश्ती डूबती, संभालती बस दिनकर के नियमित जीवन की तरह चलती ही चली जाती है।
तुम्हारे साथ बिताए गए बेहद खास और हसीन लम्हों की यादों के अलावा मेरे पास कुछ ऐसी यादें भी हैं जिन्हें मैं याद नहीं रखना चाहता लेकिन क्या करूं यादें हैं ना, भूल भी नहीं सकता। इन यादों के पीछे का सच मुझे जीने नहीं देता, पल-पल, हर पल वे यादें तुम्हें मुझसे दूर जाकर किसी और के आगोश में होने का अहसास कराती हैं। अफसोस, मुझे इस सच के साथ ही जीना होगा लेकिन एक सच ऐसा भी है जिसे मैं अपने साथ लेकर नहीं जी सकता और इसलिए उस सच को झूठ में बदल दूंगा। तुम मेरी न हुई तो क्या हुआ लोग तुम्हें मेरे नाम से ही जानेंगे। क्वीन... गौरव की #क्वीन
मेरे भगवान को हरा दिया था तुमने
याद है वह दिन जब तुम्हारी मासी ने तुमसे तुम्हारा मोबाइल फोन छीन लिया था क्योंकि तुम एक 'काफिर' से बात करती थी। 2 दिन बिना तुम्हारी आवाज सुने कैसे रहा था मैं... पता है, वह एक ऐसा दौर था जब हमारी मोहब्बत का जुनून हिमालय के सर्वोच्च शिखर पर था... पूरे 37 घंटे के बाद तुमने किसी और के फोन से मुझे कॉल किया था और 48 सेकंड में अपने आंसुओं के साथ बस इतना ही बोल पाई थी, 'गौरव, अपना ख्याल रखना। मैं कैसे भी तुम्हें जल्द कॉल करूंगी।'
उस दिन विश्वास रूपी बीज ने जैसे अचानक वृक्षाकार ले लिया था। मुझे पूरा विश्वास था कि कोई तुम पर कितना भी दबाव डाले लेकिन तुम अपने मन पर सिर्फ मेरा एकाधिकार कायम रखोगी। उम्मीद और विश्वास, इन दोनों शाश्वत सिद्धियों को हमने अपने प्रेम की आधारशिला में स्थापित कर रखा था।
फिर उस दिन कैसे तुम उसे अपने करीब आने से नहीं रोक पाई। क्यूं कमजोर हो गई थी तुम्हारी मोहब्बत? क्या अपने आप से विश्वास उठ गया था तुम्हारा? नहीं! तुम किसी से नहीं हारी थी उस दिन... हारा तो मैं था, अपने आप से... हारा तो मेरा प्यार था, तुम्हारी भटकाव से... हारा तो मेरा विश्वास था, तुम्हारी मजबूरी थी... हारा मेरा भगवान था, तुम्हारी उस एक गलती से...
#क्वीन
उस दिन विश्वास रूपी बीज ने जैसे अचानक वृक्षाकार ले लिया था। मुझे पूरा विश्वास था कि कोई तुम पर कितना भी दबाव डाले लेकिन तुम अपने मन पर सिर्फ मेरा एकाधिकार कायम रखोगी। उम्मीद और विश्वास, इन दोनों शाश्वत सिद्धियों को हमने अपने प्रेम की आधारशिला में स्थापित कर रखा था।
फिर उस दिन कैसे तुम उसे अपने करीब आने से नहीं रोक पाई। क्यूं कमजोर हो गई थी तुम्हारी मोहब्बत? क्या अपने आप से विश्वास उठ गया था तुम्हारा? नहीं! तुम किसी से नहीं हारी थी उस दिन... हारा तो मैं था, अपने आप से... हारा तो मेरा प्यार था, तुम्हारी भटकाव से... हारा तो मेरा विश्वास था, तुम्हारी मजबूरी थी... हारा मेरा भगवान था, तुम्हारी उस एक गलती से...
#क्वीन
उस दौर में सब 'पागल' थे...
प्रेम, चाहत, जुनून, समर्पण... ये सब सिर्फ शब्द थे मेरे लिए लेकिन जब तुम मिली तो इन शब्दों के मायने समझ में आये... कितना खुशनसीब था मैं जो मैंने इन शब्दों को अहसास में बदलते हुए महसूस किया और इन्हें जिया भी... जब तुम्हारे घरवालों का तुमसे और खुद से व्यवहार असहनीय हो जाता था तो लगता था कि जैसे मोहब्बत नहीं बल्कि कोई गुनाह कर दिया है लेकिन इस मानव रूपी जीवन में जैसे गुनाहों की लिस्ट लंबी होती जाती है, वैसे ही मेरी मोहब्बत भी बढ़ती ही गई...
लोग कहते हैं कि जब कोई लंबे समय तक नहीं मिलता, सामने नहीं आता तो मोहब्बत खत्म हो जाती है लेकिन देखो इतने साल हो गए पर मेरी मोहब्बत खत्म न हुई... तुम्हें पाने की चाहत तो कभी थी ही नहीं लेकिन अफसोस इस बात का है कि हमारी इस कहानी पर 'अधूरी' रहने का धब्बा लग गया।
कितना छिप-छिप कर बात करती थी तुम, कैसे मिलते थे हम, जब वो सब याद करता हूं तो होठों पर मुस्कान आ जाती है... तुम्हारी कॉलोनी के बाहर गेट के किनारे घंटो खड़ा रहता था, तुम्हारे उस भाई से नोट्स के बहाने प्रेमपत्र भिजवाता था, उस बेचारे को तो इतना भी समझ में नहीं आता था कि कॉमर्स वालों को साइंस वालों के नोट्स की जरूरत नहीं होती। सच में... उस दौर में सब के सब पागल थे... बस सब कुछ हो रहा था... कैसे और क्यूं के बारे में कोई सोचता ही नहीं था... बेहद खूबसूरत कहानी है हमारी... बिलकुल चांद की तरह और उसी चांद की तरह इस कहानी पर भी एक धब्बा लगा है... 'अधूरी' होने का धब्बा... अब तो बस यही कह सकता हूं कि काश! हम मोहब्बत के उस आगाज को अंजाम तक पहुंचा सकते...
#क्वीन
लोग कहते हैं कि जब कोई लंबे समय तक नहीं मिलता, सामने नहीं आता तो मोहब्बत खत्म हो जाती है लेकिन देखो इतने साल हो गए पर मेरी मोहब्बत खत्म न हुई... तुम्हें पाने की चाहत तो कभी थी ही नहीं लेकिन अफसोस इस बात का है कि हमारी इस कहानी पर 'अधूरी' रहने का धब्बा लग गया।
कितना छिप-छिप कर बात करती थी तुम, कैसे मिलते थे हम, जब वो सब याद करता हूं तो होठों पर मुस्कान आ जाती है... तुम्हारी कॉलोनी के बाहर गेट के किनारे घंटो खड़ा रहता था, तुम्हारे उस भाई से नोट्स के बहाने प्रेमपत्र भिजवाता था, उस बेचारे को तो इतना भी समझ में नहीं आता था कि कॉमर्स वालों को साइंस वालों के नोट्स की जरूरत नहीं होती। सच में... उस दौर में सब के सब पागल थे... बस सब कुछ हो रहा था... कैसे और क्यूं के बारे में कोई सोचता ही नहीं था... बेहद खूबसूरत कहानी है हमारी... बिलकुल चांद की तरह और उसी चांद की तरह इस कहानी पर भी एक धब्बा लगा है... 'अधूरी' होने का धब्बा... अब तो बस यही कह सकता हूं कि काश! हम मोहब्बत के उस आगाज को अंजाम तक पहुंचा सकते...
#क्वीन
वो ऑरकुट वाली लाइफ...
आज पूरे 10 साल हो गए तुम्हें सामने से देखे हुए और आज से ठीक 11 साल पहले उस पार्क में हमने जिंदगी भर एक-दूसरे के साथ रहने का वादा किया था। तुम्हारी आंखों में खुद को खोजते हुए जब मैंने तुमसे पूछा था कि हमारी शादी कब होगी तो तुमने बस एक मुस्कान के साथ प्यार पर भरोसा करने की बात कह दी थी। और उसके 1 साल के बाद सब बदल गया था... बस नहीं बदली थी तो तुम्हारी ऑरकुट प्रोफाइल... वहीं देखता था तुम्हें...
आज थकी सी, उनींदी, बोझल आंखों के साथ जब प्रेम के शाश्वत प्रतीक रूप में विश्वास और अभिनय रूपी मुस्कान की परिभाषाएं गढ़ते हुए तुम उसकी बाहों अपनी खुशबू बिखर रही होगी तो उस रात क्या तुम्हें उस पहली छुवन का अहसास याद नहीं आया होगा? क्या तुमने पानी बन कर अपनी आंखों की कोर से बह निकले अफसोस को साड़ी के पल्लू से पोछकर हमारी उस अधूरी कहानी को भूलने के लिए उसकी उंगलियों को अपने बालों को सहलाने से मना नहीं किया होगा? क्या उस दिन तुम प्यास के पहाड़ पर सूखे पड़ गए झरने जैसा महसूस नहीं कर रही होगी...
पहले अगर एक दिन हमारी बात नहीं होती थी तो तुम ऐसे तड़पती थी जैसे लहरों से दूर जाने पर मछली तड़पती है। तुम्हारे सपने मेरे अरमान बन चुके थे, मेरा हर अपना पराया लगने लगा था, एक विश्वास था कि तुम मेरी अपनी हो लेकिन मैं भूल गया था कि हमारा रिश्ता बर्फ की तरह था जिसे उसकी प्रेम रूपी गर्माहट ने पानी कर दिया था....
#क्वीन
आज थकी सी, उनींदी, बोझल आंखों के साथ जब प्रेम के शाश्वत प्रतीक रूप में विश्वास और अभिनय रूपी मुस्कान की परिभाषाएं गढ़ते हुए तुम उसकी बाहों अपनी खुशबू बिखर रही होगी तो उस रात क्या तुम्हें उस पहली छुवन का अहसास याद नहीं आया होगा? क्या तुमने पानी बन कर अपनी आंखों की कोर से बह निकले अफसोस को साड़ी के पल्लू से पोछकर हमारी उस अधूरी कहानी को भूलने के लिए उसकी उंगलियों को अपने बालों को सहलाने से मना नहीं किया होगा? क्या उस दिन तुम प्यास के पहाड़ पर सूखे पड़ गए झरने जैसा महसूस नहीं कर रही होगी...
पहले अगर एक दिन हमारी बात नहीं होती थी तो तुम ऐसे तड़पती थी जैसे लहरों से दूर जाने पर मछली तड़पती है। तुम्हारे सपने मेरे अरमान बन चुके थे, मेरा हर अपना पराया लगने लगा था, एक विश्वास था कि तुम मेरी अपनी हो लेकिन मैं भूल गया था कि हमारा रिश्ता बर्फ की तरह था जिसे उसकी प्रेम रूपी गर्माहट ने पानी कर दिया था....
#क्वीन
Sunday, April 9, 2017
RSS और मोहब्बत की संयुक्त 'जीत'
उस दिन तुमने बताया कि तुम्हारे मामा जी मुझसे मिलना चाहते हैं। तुमने उनको हमारे बारे में सब कुछ बता दिया था। जैसे ही मैंने उनको अपना नाम बताया, उनके मुंह से बस एक ही वाक्य निकला, 'हिन्दू हो?' फिर जब तुमने उनको बताया कि मैं संघ से भी जुड़ा हूँ तो उनका लाल चेहरा पीला सा दिखने लगा। पूरे दो घंटे तक उनसे संघ की विचारधारा को लेकर बहस हुई।
उन्होंने 1000 तर्क देकर यह साबित करने की कोशिश की कि संघ एक कट्टर विचारधारा वाला संगठन है लेकिन व्यवहारिकता के ज्ञान और तुम्हारी मोहब्बत की शक्ति ने आखिर उनसे यह कहलवा ही दिया कि संघ कट्टर विचारधारा वाला नहीं बल्कि राष्ट्रवादी विचारधारा वाला संगठन है। उसके बाद वो जिस तरह से तुम्हारे मेरे प्रेम को नए आयाम दे रहे थे वह सचमुच आश्चर्यजनक था।
तुमने बताया था ना कि जब तुम्हारेे पापा को मेरे बारे में पता लगा तो उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया था कि एक काफिर से कोई रिश्ता नहीं हो सकता। पता है आज यह बात क्यों याद आयी? आज मैं फिर उसी मंदिर में गया था जहाँ चलने के लिए तुमने मेरे साथ फिल्म देखने के ऑफर को ठुकरा दिया था। तुम तो शायद अब कभी वहां नहीं जा पाओगी लेकिन आज उस मंदिर में माँ की प्रतिमा के सामने जाकर तुम्हारे द्वारा किए गए सारे वादे याद आ गए। वो सारे वादे जिनमें मैं और तुम, 'हम' हुआ करते थे।
#क्वीन
उन्होंने 1000 तर्क देकर यह साबित करने की कोशिश की कि संघ एक कट्टर विचारधारा वाला संगठन है लेकिन व्यवहारिकता के ज्ञान और तुम्हारी मोहब्बत की शक्ति ने आखिर उनसे यह कहलवा ही दिया कि संघ कट्टर विचारधारा वाला नहीं बल्कि राष्ट्रवादी विचारधारा वाला संगठन है। उसके बाद वो जिस तरह से तुम्हारे मेरे प्रेम को नए आयाम दे रहे थे वह सचमुच आश्चर्यजनक था।
तुमने बताया था ना कि जब तुम्हारेे पापा को मेरे बारे में पता लगा तो उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया था कि एक काफिर से कोई रिश्ता नहीं हो सकता। पता है आज यह बात क्यों याद आयी? आज मैं फिर उसी मंदिर में गया था जहाँ चलने के लिए तुमने मेरे साथ फिल्म देखने के ऑफर को ठुकरा दिया था। तुम तो शायद अब कभी वहां नहीं जा पाओगी लेकिन आज उस मंदिर में माँ की प्रतिमा के सामने जाकर तुम्हारे द्वारा किए गए सारे वादे याद आ गए। वो सारे वादे जिनमें मैं और तुम, 'हम' हुआ करते थे।
#क्वीन
काश! उस दिन बात कर लेता तुमसे
जब पता लगा कि शादी के बाद तुम अपने पति के साथ दिल्ली शिफ्ट हो गई तो मन में एक उम्मीद जगी कि 10 साल के बाद शायद तुमसे अचानक किसी मॉल, किसी मार्केट में मुलाकात हो जाए। उस दिन मैं क्लास लेने के लिए मेट्रो से हौज खास जा रहा था। राजीव चौक पर जब येलो लाइन मेट्रो पर चढ़ा तभी अचानक मेट्रो का गेट बंद होते होते रुक गया। बैग फंस गया था तुम्हारा, तुम अंदर आयी और मैं पीछे मुड़ा। उस भीड़ में तुम्हारी नजरें तो मुझसे नहीं मिल पायीं लेकिन तुम्हें अपने सामने देखकर ऐसा लगा जैसे वर्षों की कामना पूरी हो गई।
तुम मेरे सामने थी लेकिन मैं तुमसे बात नहीं करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। मैं चाहता था कि बात करने से पहले एक बार फिर से तुम्हारी नजरों से मेरी नजरें मिल जाएं। मैं चाहता था कि तुम एक बार थोड़ा सा बाईं ओर घूम जाओ और मैं तुम्हारी आँख के किसी कोने में खुद को संजोया हुआ देख लूं। लेकिन तुम तो जैसे किसी और ही दुनिया में ही खोई थी। फिर मन किया कि चलो बात कर ही लूं लेकिन दूसरे ही पल 5 महीने पुरानी तुम्हारी शादी की वह तस्वीर मेरी आँखों के सामने गयी जो तुमने अपने पति के साथ #बार_बार_देखो लिखकर पोस्ट की थी।
मैं इन्हीं उलझनों में फंसा था कि ग्रीन पार्क मेट्रो स्टेशन आ गया और तुम मेट्रो से उतर कर चंद पलों में मेरी आँखों के सामने से ओझल हो गई। फिर से तुम्हारे इतना करीब आकर दूर जाने के अहसास को झेलना मेरे लिए शायद नामुमकिन सा था, शायद इसीलिए मेरी आंख खुल गई और मैं उस सुखद स्वप्न से बाहर आ गया। सुबह का 5:30 बज रहा था।
कहते हैं सुबह के सपने सच हो जाते हैं। काश! मेरा यह सपना सच हो जाये, अगर ऐसा हुआ तो इस बार तुमसे बात करने से खुद को नहीं रोकूंगा। और अगर यह सपना कभी सच नहीं हुआ तो आज से 10 साल बाद भी खुद को इस बात के लिए कभी माफ नहीं कर पाऊंगा कि उस सपने में तुमसे बात नहीं की। काश! मैं उस हसीन सपने में तुमसे बात कर लेता, तो शायद वो सपना कुछ ज्यादा लंबा हो जाता और मुझे सपने में ही सही लेकिन तुम्हारे साथ बिताने के लिए कुछ और टाइम तो मिल जाता...
#क्वीन
तुम मेरे सामने थी लेकिन मैं तुमसे बात नहीं करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। मैं चाहता था कि बात करने से पहले एक बार फिर से तुम्हारी नजरों से मेरी नजरें मिल जाएं। मैं चाहता था कि तुम एक बार थोड़ा सा बाईं ओर घूम जाओ और मैं तुम्हारी आँख के किसी कोने में खुद को संजोया हुआ देख लूं। लेकिन तुम तो जैसे किसी और ही दुनिया में ही खोई थी। फिर मन किया कि चलो बात कर ही लूं लेकिन दूसरे ही पल 5 महीने पुरानी तुम्हारी शादी की वह तस्वीर मेरी आँखों के सामने गयी जो तुमने अपने पति के साथ #बार_बार_देखो लिखकर पोस्ट की थी।
मैं इन्हीं उलझनों में फंसा था कि ग्रीन पार्क मेट्रो स्टेशन आ गया और तुम मेट्रो से उतर कर चंद पलों में मेरी आँखों के सामने से ओझल हो गई। फिर से तुम्हारे इतना करीब आकर दूर जाने के अहसास को झेलना मेरे लिए शायद नामुमकिन सा था, शायद इसीलिए मेरी आंख खुल गई और मैं उस सुखद स्वप्न से बाहर आ गया। सुबह का 5:30 बज रहा था।
कहते हैं सुबह के सपने सच हो जाते हैं। काश! मेरा यह सपना सच हो जाये, अगर ऐसा हुआ तो इस बार तुमसे बात करने से खुद को नहीं रोकूंगा। और अगर यह सपना कभी सच नहीं हुआ तो आज से 10 साल बाद भी खुद को इस बात के लिए कभी माफ नहीं कर पाऊंगा कि उस सपने में तुमसे बात नहीं की। काश! मैं उस हसीन सपने में तुमसे बात कर लेता, तो शायद वो सपना कुछ ज्यादा लंबा हो जाता और मुझे सपने में ही सही लेकिन तुम्हारे साथ बिताने के लिए कुछ और टाइम तो मिल जाता...
#क्वीन
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