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Saturday, August 13, 2016

हो सकता है तुमको यह गलत लगे...


आखिर क्यों लिखता हूं तुम्हें, क्या इसलिए कि लोग कहें कि अरे देखो, गौरव की मोहब्बत तो लाजवाब है? या फिर इसलिए कि लोग मेरे दर्द पर वाह-वाह करें। नहीं! इनमें से कोई कारण नहीं है। फिर सच क्या है? शायद मुश्किल हो तुम्हारे लिए लेकिन सच यह है कि मैंने अपनी मां को बचाने के लिए अपनी भावनाओं का बाजार लगा दिया। और अपनी मां के लिए ही तुम्हें भी अपने सपने में शामिल कर लिया। शायद तुम्हें ये गलत या बुरा लगे लेकिन यही सच है।

क्या सच्ची मोहब्बत के पैमाने किसी भाषा पर आधारित होते हैं। क्या मोहब्बत 'Never Love a Stranger' जैसी चीजें लिखने से ही सच्ची मानी जाएगी। नहीं, मोहब्बत की असली भाषा तो हिंदी है क्योंकि इसमें रिश्ते हैं, रिश्तों में मर्यादा है, मर्यादा में विश्वास है, विश्वास में प्रेम है और प्रेम में संमृद्धता है। अब अगर दुनिया यह मानती है कि मैं गलत कह रहा हूं तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन अगर मेरे भाई बहन ही इसे गलत मान लेंगे तो मेरी जिम्मेदारी है कि मां के अस्तिव को बचाने के लिए, मां की वास्तविकता से उनका परिचय कराने के लिए इन विषयों को प्रमाणित करूं। बस मैं अपनी जिम्मेदारी निभा रहा हूं.... और इसीलिए मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगा जब उस लड़के ने कहा कि वह मेरी फेसबुक पोस्ट्स का अंग्रेजी में अनुवाद करेगा।
#क्वीन

Friday, August 12, 2016

क्या मुझे इस बात पर खुश होना चाहिए?

पता है, आज मेट्रो में एक लड़का मिला। मुझे घूरने की अवस्था में पहले तो वह 10-15 मिनट खड़ा रहै और फिर अचानक मेरे पास आकर बोला कि सर, आप विश्व गौरव हैं ना? मैंने भी 'हां' में जवाब देते हुए पूछ लिया कि लेकिन भाई, कैसे जानते हो मुझे? उसने कहा कि सर, मैं आपसे फेसबुक पर और अपनी #क्वीन के बारे में फेसबुक पर जो भी लिखते हैं, उसका अंग्रेजी में ट्रांसलेट करके एक संकलन जैसा कुछ तैयार कर रहा हूं। तब मुझे ध्यान में आया कि फैजल सलीम नामक उस लड़के ने ही शायद मुझे पिछले महीने मेसेज करके कहा था कि मैं अपनी #क्वीन से जुड़ी फेसबुक पोस्ट्स की एक किताब छपवाऊं।

उसने तुम्हारी तारीफ में और भी बहुत कुछ कहा। मुझे अच्छा लगा कि कम से कम मेरी कलम में इतनी ताकत तो है कि तुमको भी लोग 'पसंद' करने लगे हैं। उसके मुताबिक तुम दुनिया की सबसे खुशनसीब लड़की हो क्यों कि जो इंसान तुम्हें प्यार करता है, उस इंसान के प्रेम पर वे लोग भी प्रश्नचिन्ह नहीं लगा पा रहे जो उसे जानते तक नहीं। वैसे मुझे भी इस बात का गुरुर है कि मैं तुमसे प्यार करता हूं। बहुत कीमती चीज है प्यार मेरे लिए और इसी कारण मैं भी यही मानता हूं कि तुम वाकई में खुशनसीब हो कि मैं तुम्हें चाहता हूं। ये मेरा अहंकार नहीं बल्कि मेरे प्रेम की पवित्रता पर विश्वास है।

लेकिन एक बात बताओ तो जरा कि क्या तुमसे जुड़ी पोस्ट का अनुवाद करने वाली बात को लेकर मुझे खुश होना चाहिए? क्या मुझे गर्व होना चाहिए कि मेरी कलम से जो लिखा गया उसका ट्रांसलेशन करके लोग उसे छपवाने की बात कर रहे हैं? मैं क्या सोचता हूं, वह कल बताउंगा लेकिन तुमसे जानने की इच्छा जरूर है।

Thursday, August 11, 2016

हमारे रिश्ते की परिभाषा

वक्त ने हमारे रिश्ते की परिभाषा ही बदल दी..पहले दोस्ती , फिर प्यार और फिर अजनबी सा अहसास... बहुत खास था वह अहसास, जिसमें गुस्सा होने के बाद भी एक-दूसरे की परवाह होती थी, जिसमें बिना मिले एक-दूसरे से बात होती थी... यह सच्चा प्यार हो न हो लेकिन सच्चा रिश्ता तो था, एक ऐसा रिश्ता जिसमें एक-दूसरे के प्रति पुष्पित हुए लगाव को पल्लवित करके जीवनरेखा की पराकाष्ठा तक पहुंचाया गया हो। लेकिन शायद तुम इस बात को नहीं समझ पाई कि रिश्तों की डोर तब कमज़ोर पड़ जाती है जब इंसान ग़लतफ़हमी में उठने वाले 'सवालों' का 'जवाब' खुद बना लेता है। काश! तुम अपनी खामोशी को तोड़कर मुझसे बात कर लेती, काश! मैं अपने गुरूर को छोड़कर तुमसे बात कर लेता, काश! हम भ्रम के तिलिस्म को फोड़कर विश्वास का नया आधार स्थापित करते, काश! मैं तुमको तुमसे ही मांगता और तुम मुस्कुराकर कहती कि गौरव, कोई अपनी चीजें मांगता है क्या? पता है, कुछ लोग बड़े होने के वहम में अपनों को खो देते हैं और कुछ लोग बड़े होने के अहम में...काश! तुम यह बात समझ पाती और फिर मुझे भी यह समझा पाती... अगर यह बात हम दोनों को समय पर समझ आ जाती तो हम साथ होते...

हमसे जुड़ा हर एक किस्सा दिल में बसा है, उनको कागज पर आबाद कर रहा हूं... अब एकबार सोचकर देखो कि जब मैं उन किस्सों को नहीं भूल सकता तो तुम्हें कैसे भूल जाऊं? तुमको लेकर मेरा ख्याल कभी नहीं बदल सकता... मोहब्बत चेहरे से होती तो भूल भी जाता लेकिन क्या करूं यार मोहब्बत तो आत्मा से है...

प्रेम जब तन से होता है तो वासना होता है
प्रेम जब मन से होता है तो भावना होता है
और प्रेम जब आत्मा से होता है तो आराधना हो जाता है... अब अपनी आराधना को छोड़ कर पाप का भागी तो नहीं बन सकता मैं...

#क्वीन

Sunday, August 7, 2016

.बस तरीका बदल गया...

और फिर जिंदगी अपने रास्ते पर चल पड़ी... तुमने वक्त समझकर मुझे गुजार दिया और मैं तुम्हारे साथ बिताए हर एक लम्हे को अपनी कल्पनाओं के सागर में डूबकर जिंदगी माने हुए आज भी जी रहा हूं। जब भी कुछ लिखता हूं और वह तुम तक पहुंचता है तो उसमें कुछ भी ऐसा नहीं होता जो बहुत खास हो लेकिन मेरे और तुम्हारे लिए उसका हर एक शब्द बेहद महत्वपूर्ण होता है। अनुभव और अनुभूति के इस अनूठे संगम को लिखने की क्षमता होना आसान नहीं है, मैं अपनी ही तबाही पर 'वाह-वाह' सुनता हूं।

तुम्हारे हर एक लफ्ज के हजारों मतलब निकालता था मैं...और कर भी क्या सकता था, बातें ही अधूरी करती थी तुम... और पता है आज भी कोई है जो मेरी ही तरह तुम्हारी अधूरी बातों के अलग-अलग मतलब निकालकर रात-रात भर जागता है... मैं उसे नहीं समझा सकता...मैं उसे नहीं रोक सकता... तब मुझे भी कहां कोई समझा पाया था...मुझे भी कहां कोई रोक पाया था, वह सब करने से... जुनून, हौसला, पागलपन सब कुछ वैसा ही है...बस तरीका बदल गया है... जिंदगी जीने का, पर लक्ष्य वही है...

Saturday, August 6, 2016

हमारा रिश्ता

बहुत खूबसूरत है हमारा रिश्ता क्योंकि इसमें हमें एक दूसरे पर किसी तरह का शक नहीं है... यह खूबसूरती और भी ज्यादा इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि इस रिश्ते में 'हक' जैसी भी कोई चीज नहीं है। बस एक बात जो आज तक मुझे समझ में नहीं आई, वह यह है कि तुम्हें मैंने हर दिन अपने श्रीराम से मांगा...लेकिन तुम नहीं मिली...इसकी वजह क्या थी? क्या मेरी चाहत की शिद्दत में कोई कमी थी या फिर उन दुआओं में किसी तरह की कमी रह गई थी? पर इन सवालों का तुमसे कैसा वास्ता? ये सवाल तो मुझे अपने श्रीराम से पूछने चाहिए...लेकिन नहीं, उनसे मैं ये सवाल नहीं पूछ सकता क्योंकि अगर मैं उनसे ये सारे सवाल पूछुंगा तो वह समझ लेंगे कि मुझे उनके निर्णय के सौन्दर्य पर शंका है।

मुझे उनके निर्णय पर किसी तरह की शंका नहीं है, उन्होंने जरूर कुछ बेहतर ही सोचा होगा... मैं तो बस अपनी व्यक्तिगत जानकारी के लिए इन सवालों के जवाब जानना चाहता हूं...हो सकता है कि मैंने कुछ गलत किया हो, कुछ ऐसा जो मुझे नहीं करना चाहिए था और फिर अब मुझे अपनी वह गलती याद न आ रही हो। वैसे याददाश्त का कमजोर होना कोई बुरी बात नहीं होती है, बहुत बैचेन रहते हैं वे लोग, जिन्हें हर बात याद रहती है...

Thursday, August 4, 2016

मेरा प्रदर्शन और तुम्हारा दर्शन

उस दिन तुमने मुझे बताया कि तुम मार्केट जा रही हो... लेकिन मिलने या बात करने की कोई व्यवस्था नहीं थी क्योंकि तुम्हारे साथ तुम्हारी मासी जी भी थीं। और मैं, तुम्हारे दर्शन और मासी के सामने स्वयं के प्रदर्शन का मौका नहीं छोड़ सकता था...उस मार्केट के रास्ते पर बहुत ट्रैफिक रहता था... मैं उस मार्केट के पहले वाले चौराहे पर लगभग 1 घंटे खड़ा रहा, बस इस इंतजार में कि तुम निकलोगी और मैं तुम्हारी उस प्यारी सी मुस्कान को देख पाऊंगा।

तुम रिक्शे से अपनी मासी जी के साथ मेरे सामने से गुजरी लेकिन तुम्हारी नजर मुझ पर नहीं पड़ी... मार्केट के पास जाम में फंसा तुम्हारा रिक्शा...उस रिक्शे पर बैठी तुम और रिक्शे के पीछे हॉर्न बजाता मैं... आज सब कुछ सपने की तरह लगता है... अगर सपना मानूं तो उम्मीद रहती है कि यह तो पूरा हो सकता है और अगर उसे बीता कल मानूं तो लगता है कि अगर पहले हो सकता है तो अब क्यों नहीं... मैं सच जानता हूं पर मानता नहीं... या फिर यूं समझ लो कि मानना नहीं चाहता...

मैं यह भी जानता हूं कि अब यह सब एक ऐेसे स्वप्न का रूप ले चुका है जो कभी यथार्थ नहीं बन सकता लेकिन ईश्वर से एक निवेदन करता रहता हूं कि मुझे वह इतनी क्षमता दें कि मुझे तुम्हारे सामने कभी नजर न झुकानी पड़ें... ताकि मैं तुम्हारी आंखों में अपनी अधूरी हसरतों को देख सकूं...और साथ ही तुम भी मेरी आंखों में अपनी असली खूबसूरती को देख सको...विश्वास मानो, मैं तुम्हें अपनी आंखों में तुम्हारी जिस खूबसूरती को दिखा सकता हूं, वह कोई आइना नहीं दिखा सकता...

Tuesday, August 2, 2016

तीखेपन का प्यार

पता है आज क्या हुआ, आज मेरी एक प्यारी सी छोटी बहन चाउमीन खा रही थी... चाउमीन तीखी होने के बाद भी वह खाती रही... मैं उसकी आंखों में देख रहा था, आंखों में आंसू थे पर वह खाना बंद नहीं कर रही थी... उसकी आंखों ने उस दिन की याद दिला दी जह मैंने पहली और आखिरी बार तुम्हारे साथ खाना खाया था... कितनी तीखी थी वह दाल...तुम भी 'तीखा' नहीं खा पाती थी लेकिन तुम्हें सबसे ज्यादा 'तीखा' ही पसंद था... याद है तुम्हें, उसी दिन हमने गोलगप्पे भी खाए थे... इतना 'रोने' के बाद भी तुम गोलगप्पे में और ज्यादा 'तीखी चटनी' डालने को कह रही थी। तुम्हारे आंसू गिरते जा रहे थे और तुम गोलगप्पे खाए जा रही थी...
वही एक दिन था जब मुझे तुम्हारी आंखों में आंसू होने के बावजूद हंसी आ रही थी। वह तुम्हारी खुद को चुनौती देने की क्षमता थी या पागलपन, यह सब मुझे नहीं पता। मैं बस इतना जानता हूं कि तुम्हारी हर एक 'आदत' ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। मेरी मोह्ब्बत को तुममें किसी ऐसे शख्स की तलाश नहीं थी जिसके साथ रहा जाए बल्कि मेरी मोह्ब्बत तो तुममें ऐसा शख्स खोजती थी जिसके बगैर रहा ही न जाए...लेकिन मुझे वह नहीं मिला... पर वह सख्स नहीं मिला, यह भी अच्छा ही हुआ... क्योंकि अगर वह मिल जाता तो उसी के साथ, उसी में खोकर सब कुछ भूल जाता... मुझे वह तो नहीं मिला लेकिन मेरे 'राम' मिल गए...उम्मीद से ज्यादा है मेरे लिए इतना... उनके लिए तो मेरे मन में तुमसे भी ज्यादा समर्पण है...
‪#‎क्वीन‬