सबसे ज्यादा पढ़ी गईं पोस्ट

Saturday, July 23, 2016

तुम्हारा अधिकार

यह मेरी उजड़ी हुई जिंदगी की कहानी है, लेकिन अपनी कीमत का अंदाजा इस बात से लगाओ कि मेरी इस कहानी में सबसे मजबूत किरदार तुम्हारा ही तो है। तुम मुझसे पूछती थी ना कि मेरी जिंदगी पर तुम्हारा कितना अधिकार है? जरा बताओ तो कि खुद पर तुम्हारा कितना अधिकार है? तुम ही तो थी मेरी जिंदगी...और देखो ना मैंने तुम्हारा अधिकार अब तक नहीं छीना... आज भी मेरी कलम से निकला पहला शब्द कुछ भी हो लेकिन आखिरी शब्द तुम पर ही खत्म होता है। तुमने मेरे बहुत से स्केच बनाए लेकिन तुमको पारंगत नहीं कह सकता... पारंगत तो तब मानता जब उन चित्रों में तुम मेरी खुशी और मेरे दर्द को भी जगह दे पाती...
आसमान में एक चांद होता है लेकिन तारे करोड़ों होते हैं, अगर किसी दिन कुछ तारे ना भी दिखें तो कोई फर्क नहीं पड़ता... चांद अपनी दूधिया रोशनी से सब कुछ रोशन कर देता है लेकिन अगर उसी आसमान में कुछ तारे ज्यादा दिखने लगें और चांद ना दिखे तो चारों ओर अंधेरा छा जाता है... कुछ ऐसी ही कहानी तो हमारे रिश्ते की भी है... सिर्फ तुम ही तो थी जिसने मेरी जिंदगी को रोशन करके रखा था और आज बहुत से लोग हैं लेकिन जिंदगी के इस अंधेरे में नजरें तुम्हें ही खोजती हैं... काश! तुम इस अंधेरे में एक बार फिर से मेरा हाथ थाम कर कहती कि देखो गौरव, मैं वापस आ गई...
मैं जानता हूं कि इस घने अंधेरे में तुम मुझे नहीं मिलने वाली... तुम्हारे वापस आने कल्पना करना मेरे लिए सिर्फ एक सपना है लेकिन सपने देखने का अधिकार तो है ना मेरे पास... मैं जानता हूं इस अंधेरे में तुम्हारा मिलना नामुमकिन है लेकिन अब तुम्हें खोजना बंद कर तुम्हारे सहारे खुद को खोज रहा हूं...उम्मीद है जिस दिन खुद को पा लिया उसदिन तुमसे किए गए उस वादे को पूरा कर पाऊंगा... हां, वही... तुम्हारी पहचान बनने का वादा...
‪#‎क्वीन‬

Friday, July 22, 2016

हमेशा रहोगी तुम...

तुम अपनी बालकनी में खड़ी थी उस दिन और मैं तुम्हारे घर के नीचे... बारिश का मौसम बन रहा था और बारिश से पहले की ठंडी हवा ने तुम्हारे सर से तुम्हारे चेहरे के रंग वाले गुलाबी दुपट्टे को तुम्हारे सर से नीचे गिरा दिया था.. उसके बाद हवा के उस झोंके से तुम्हारे बाल जिस तरह से उड़े थे, यकीन मानो उसके बाद जब मैं उस दिन की बारिश में भीगकर बीमार हुआ तो ऐसा लग रहा था जैसे उस 30 सेकंड के हसीन दृश्य के लिए 6 दिन का बुखार काफी कम है।
बुखार के कारण मैं तुमसे नहीं मिल पाया पर तुम भी दूरी को बर्दाश्त नहीं कर पाई और आ गई तीसरे दिन मेरे पास... 3 दिन में 21 स्केच बनाए थे तुमने और फिर अपने ही बनाए स्केच को दिखाकर हंस रही थी... फिर अचानक तुम्हारी आंखों में आंसू आ गए... तुम तो जानती थी ना... बस वे दो बूंद ही तो मेरी कमजोरी बन जाते थे... उन आंसुओं की कीमत अगर मेरी सारी खुशियां होती तो इस कीमत को चुकाने से भी परहेज नहीं करता लेकिन तुम्हारे उन आंसुओं को रोकने के लिए कुछ और ही कीमत चुकानी पड़ी... अवांछित कीमत थी.. पर तुम्हारी खुशी का मामला था तो चुकाने से पीछे हटना संभव नहीं था... चुका दी वह कीमत भी... हमेशा के लिए तुमसे दूर जाकर... लेकिन एक वादा है कि मेरी जिंदगी से तो दूर चली गई हो पर अपनी सोच से कभी तुम्हें दूर नहीं होने दूंगा...
‪#‎क्वीन‬

Thursday, July 21, 2016

क्यों लिखता हूं तुमको?

लोग कहते हैं कि मैं तुम्हारे बारे में या अपनी मोहब्बत के बारे में जो कुछ भी लिखता हूं वह उनको बहुत पसंद आता है लेकिन सच कहूं तो मैं बिलकुल नहीं चाहता कि मेरा दर्द किसी को खुशी दे। मैं बिलकुल यह नहीं चाहता कि मैं अपनी मोहब्बत को बेचूं, या तुमसे जुड़ी बातों के व्यक्तिगत भावों को सामाजिक रूप से दर्शाऊं...
मैं बस इतना चाहता हूं कि 'कान्ट स्टॉप द फीलिंग' सुनने वालों तक हिंदी पहुंचे और अगर कोई यह समझता है कि अंग्रेजी बोलने से कोई लड़की उससे प्यार करने लगेगी तो उसे सच का अहसास हो कि अपनी मातृ भाषा में प्रेम प्रदर्शित करना जितना आसान है, विदेशी भाषा में उसे प्रदर्शित करना उतना ही मुश्किल...अपनी मां के लिए लिखता हूं... हिंदी के लिए लिख रहा हूं... मां के अस्तित्व को बचाने के लिए अपनी महबूबा का प्रयोग कर रहा हूं... हो सकता है कोई गलत कहे लेकिन मैं आज भी सही हूं जैसे उस शाम था....
‪#‎क्वीन‬

Wednesday, July 20, 2016

तुम्हारी वह तस्वीर

बेहद खूबसूरत दिख रही थी तुम अपनी उस तस्वीर में... साड़ी में पहली बार देखा था तुम्हें... बस यही सोचने लगा था कि यह शख्स मेरे किचन में कैसा लगेगा... बहुत अच्छी लगती तुम वहां लेकिन इसके साथ एक और भी सच जुड़ा है... तुम्हें तो खाना बनाना आता ही नहीं है... तुम सिर्फ मैगी और चाय ही बना सकती हो... और इन दोनों चीजों का उपयोग मैं करता नहीं... फिर क्या करता...सच कहूं तो अगर तुम मेरे साथ होती और तुम्हें कुछ भी बनाना नहीं आता होता तो भी मैं तुम्हारे साथ रहता और तुमसे कभी नहीं कहता कि तुम कुछ बनाना सीखो...
आखिर खाना ही तो सब कुछ नहीं होता... खाना बनाने की कोई अन्य वैकल्पिक व्यवस्था हो सकती थी... लेकिन तुम्हारा कोई विकल्प नहीं... तुम खुद में एकमात्र विकल्प थी...
‪#‎क्वीन‬

Tuesday, July 19, 2016

मेरी दुआ

उस दिन तुम्हारी आंख में दर्द हो रहा था और तुम चुपचाप घर पर बिना किसी को कुछ बताए लेटी थी... मैंने तुमसे 50 बार कहा था कि बिना चश्मा लगाए लैपटॉप यूज मत किया करो लेकिन तुमको मेरी बातों से फर्क ही कहां पड़ता था... उस दिन मैं तुम्हें सुबह से कॉल कर रहा था लेकिन तुमने एक बार भी मेरा फोन नहीं उठाया... तुम मुझसे बहुत कुछ छिपा लेती थी... शायद इस लिए क्योंकि तुमको लगता था कि कहीं तुम्हारी परेशानियों से मैं भी न परेशान हो जाऊं या फिर शायद तुम मुझे अपनी परेशानियां बताना जरूरी ही नहीं समझती थी...
तुम्हारी उस 'सबसे अच्छी' फ्रेंड ने मुझे बताया कि तुम्हारे साथ क्या समस्या है। 200 से भी ज्यादा बार कॉल कर चुका था मैं उस दिन... बहुत गुस्सा भी आ रहा था... कुछ देर के बाद तुमने कॉल बैक किया और तुम्हारी आवाज सुनकर मेरा सारा गुस्सा गायब हो गया... मैं शांत था... मेरे कहने पर ही तुम अपनी उस फ्रेंड के साथ हॉस्पिटल गई वहां से वापस आकर हम उसी स्टेलर आईटी पार्क में मिले...खाना खाकर मैं तुम्हें पैदल तुम्हारे घर छोड़ने जा रहा था और तुम मुझसे अपनी बातें बताई जा रही थी...
5 मिनट के रास्ते को हमने 40 मिनट में तय किया... मुझे नहीं याद कि तुमने उस दिन क्या-क्या बोला लेकिन उन सारी बातों के दौरान तुम्हारे होंठों पर आने पर आने वाली मुस्कान हूबहू याद है...बस यही दुआ करता हूं कि तुम्हारी जिंदगी के हर एक पल में चेहरे की मुस्कुराहट वैसी ही बनी रहे...
‪#‎क्वीन‬

मेरा वादा...

कई लोग मुझसे कहते रहते हैं कि आखिर क्वीन है कौन... एक बार उसकी तस्वीर दिखा दीजिए... अब उनको कैसे बताऊं कि मेरे पास तो तुम्हारी कोई तस्वीर है ही नहीं... क्योंकि तुम्हारी तस्वीर की कोई जरूरत ही नहीं पड़ी... तस्वीर तो उसकी जरूरी होती है जिसकी याद आती हो और याद तो उसकी आती है जिसे भूला गया हो... तुम तो मेरे हर एक शब्द में, हर एक ख्याल में, हर एक सांस में बसती हो...तुम्हारी तस्वीर की क्या जरूरत है मुझे...
मुझे जब भी तुम्हारे साथ की जरूरत होती है तो बस आंखें बंद करता हूं और तुम्हें अपने पास पाता हूं... नहीं, अपने सपनों में नहीं... हकीकत में... तुम्हारे हाथ को आज भी उसी तरह से अपने हाथ में महसूस करता हूं जैसे कभी उस वीरान सड़क पर कुछ पलों के लिए महसूस किया था... मुझे उन पलों का एहसास तुम्हारी तस्वीर नहीं दिला सकती... उस एहसास को जीने के लिए तुम्हारा मेरे साथ होना बहुत जरूरी है...मुझे खुशी है कि मेरे श्रीराम मेरी इस इच्छा को हर बार पूरा कर देते हैं... जब भी मुझे तुम्हारी जरूरत होती है तुम्हें अपने पास पाता हूं... उन चंद पलों का एहसास मुझे हमेशा एक नई ऊर्जा से भर देता है...
तुम अपना कभी साथ न छोड़ने का वादा निभा रही हो... और मैं अपना वादा निभाऊंगा... हां वही वादा... तुम्हारी पहचान बनने का...
‪#‎क्वीन‬

Monday, July 18, 2016

और उस दिन...

उस दिन जा रही थी तुम... मुझे नहीं पता था कि तुमसे दोबारा कभी मुलाकात होगी भी या नहीं... चंद कदमों की दूरी पर था मैं तुमसे... तुमने तो शायद मुझे देखा भी नहीं था...एक पल को लगा कि जैसे सब कुछ हार गया हूं लेकिन... तुम्हारे 'लेकिन' की तरह ही मेरा भी एक लेकिन था लेकिन मेरा 'लेकिन' तुम्हारे लेकिन की तरह अवसादों में फंसा हुआ नहीं था... अगर उस दिन मैं खुद को हारा हुआ मान लेता तो मेरा 'लेकिन' भी तुम्हारे लेकिन की तरह ही हो जाता... हो सकता है कि तुमको या तुमसे जुड़े लोगों को लगता हो कि मैं हार गया लेकिन जहां से मैं देख रहा था वहां से सिर्फ मैं जीता था... क्योंकि जहां से मैं देख रहा था वहां से मुझे एक मासूम सी लड़की अपनी तथाकथित मासूमियत का दिखावा करते हुए उस इंसान से दूर जा रही थी जो दुनिया में उससे सबसे ज्यादा मोहब्बत करता था... वह एक ऐसे इंसान से दूर जा रही थी जिसने कभी तुमसे उस रिश्ते का नाम तक नहीं पूछा जो बेनामी की पराकाष्ठा को पार कर चुका था... उसे तो बस अपनी हर एक दुआ में तुम्हारी खुशी मांगने की आदत पड़ गई थी...कुछ पाने की चाहत में किसी 'अपने' से दूर जाना समर्पण, निष्ठा या लक्ष्य नहीं बल्कि खुदगर्जी कहलाता है...
पता नहीं तुम्हें कभी मेरी उस मोहब्बत का एहसास होगा या नहीं लेकिन मैं बस इतना जानता हूं कि अगर अब तुम कभी वापस आओगी भी तो भी तुम्हें कुछ हासिल नहीं होगा क्योंकि वह मोहब्बत तो कब की फासलों में फना हो गई...एक गलती मेरी भी थी... मैंने भी सफर-ए-जिंदगी में सिर्फ तुम्हारे लिए उनको भी नजरंदाज किया जो हासिल थे...
‪#‎क्वीन‬