कैसा रिश्ता था हमारा और कैसे थे हम... जब भी किसी 'छोटी' सी बात पर नाराज होकर झगड़ा करते थे तो 'मुझे मेसेज मत करो', 'मुझसे बात मत करो' जैसी बातें बोलकर ही घंटों बात कर लिया करते थे... और फिर जब सोने का समय हो जाए तो सब कुछ भूलकर फिर से सब नॉर्मल कर देते थे... तुमको पता है हम दोनों की सबसे अच्छी बात क्या थी? हम दोनों सिर्फ एक-दूसरे को चाहते थे, हमने एक-दूसरे से कभी कुछ नहीं चाहा... अपनी जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीकर कब हम दोनों हम से 'मैं-तुम' हो गए... तुम वह सब करने लगी जो तुम्हें अच्छा लगता था और मैं तो वह करता ही था जो मुझे पसंद था... हममें से किसी ने एक-दूसरे के लिए खुद को नहीं बदला.. आखिर बदलते भी क्यों? मोहब्बत में शर्तें कहां होती थीं...
एक बात जो मुझे हमेशा परेशान करती थी, जानती हो वह क्या थी? मैं जो करता था उससे किसी न किसी का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष फायदा जरूर होता था लेकिन तुम जो करती थी उससे सिर्फ तुम्हारे भविष्य का नुकसान था... इसमें परेशान करने वाली बात यह थी कि तुम सब कुछ जानते हुए भी वही करती जा रही थी जो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं था... तुम कहती भी थी कि हां गौरव, मैं जानती हूं कि यह मेरे लिए ठीक नहीं लेकिन... इस लेकिन के आगे तुमने कभी कुछ नहीं बताया... 'लेकिन' के मायने कितने बड़े होते हैं यह तुम्हारे उस 'लेकिन' ने ही बताया था...
#क्वीन
'क्वीन' कौन है? इस सवाल का जवाब तो मैं भी खोज रहा हूं। मैं तो बस इतना जानता हूं कि यह सामान्य को विशिष्ट बनाने का एक प्रयास है... कोई अलंकार नहीं... सिर्फ सच्ची भावनाएं... तुम थी तो सब कुछ था... तुम नहीं हो तो भी सब कुछ है....लेकिन तब वह 'सब कुछ' अच्छा लगता था लेकिन अब.... #क्वीन
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Wednesday, July 13, 2016
वह खौफनाक सुबह
रात का 1 बजा था उस दिन, पूरे 7 दिनों से हमारी बात नहीं हुई थी... मैंने घर पहुंचते ही तुम्हें कॉल लगाया... शायद तुम मेरे कॉल का ही इंतजार कर रही थी। बेहद नाराज थी उस दिन तुम कि आखिर मैंने 7 दिनों से बात क्यों नहीं की... एक साथ 6 सवाल पूछ डाले तुमने... मेरे पास उन सवालों का कोई जवाब नहीं था, या फिर यूं समझ लो कि मैं तुम्हारे उन सवालों के जवाब देना ही नहीं चाहता था। ऐसा क्यों था इस बात का जवाब तो आज भी नहीं दे सकता...
खैर, उस रात के आगोश में डूबकर तुम जिस तरह से धीमी आवाज में बात कर रही थी, वैसी आवाज मैंने कभी नहीं सुनी थी... उस आवाज में प्रेम और डर का अनूठा संगम झलक रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे तुम किसी ऐसे खौफनाक सपने में हो जिसमें तुम अपना सब कुछ खोने वाली हो और उसे बचाने का तुम्हें कोई रास्ता नहीं मिल रहा।
पता है, मोहब्बत गहरी हो या ना हो लेकिन विश्वास गहरा होना चाहिए... कुछ मिनट तक तुम्हारी उस आवाज के दर्द को महसूस किया और फिर अचानक तुमने फोन काट दिया...अगले दिन तुम जब मिली तो इतना ही बोली, 'गौरव, 'खुशबू' की तरह हूं मैं, जब तक हूं तब तक मुझे महसूस करो...स्थायित्व आ गया तो मेरा अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।'
तुमने ऐसा क्यों कहा? यह भी उन सवालों में एक है जिनका जवाब आज तक नहीं मिला....
#क्वीन
खैर, उस रात के आगोश में डूबकर तुम जिस तरह से धीमी आवाज में बात कर रही थी, वैसी आवाज मैंने कभी नहीं सुनी थी... उस आवाज में प्रेम और डर का अनूठा संगम झलक रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे तुम किसी ऐसे खौफनाक सपने में हो जिसमें तुम अपना सब कुछ खोने वाली हो और उसे बचाने का तुम्हें कोई रास्ता नहीं मिल रहा।
पता है, मोहब्बत गहरी हो या ना हो लेकिन विश्वास गहरा होना चाहिए... कुछ मिनट तक तुम्हारी उस आवाज के दर्द को महसूस किया और फिर अचानक तुमने फोन काट दिया...अगले दिन तुम जब मिली तो इतना ही बोली, 'गौरव, 'खुशबू' की तरह हूं मैं, जब तक हूं तब तक मुझे महसूस करो...स्थायित्व आ गया तो मेरा अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।'
तुमने ऐसा क्यों कहा? यह भी उन सवालों में एक है जिनका जवाब आज तक नहीं मिला....
#क्वीन
Tuesday, July 12, 2016
मजबूरी थी वह मेरी...
तुमसे दूर जाने के बाद भी मन में एक उम्मीद थी कि कभी तो तुम संपर्क साधने की कोशिश करोगी ही लेकिन तुमने ऐसा कुछ नहीं किया। ख्वाहिशें तो हजारों थीं लेकिन तुम जरूरत बनती जा रही थी... एक दौर ऐसा भी आया जब तन्हाइयों में जीना थोड़ा मुश्किल सा लगने लगा लेकिन असल मायनों में तो वह दौर मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था। उसी दौर में तो खुद से मुलाकात हुई थी मेरी... जब तक तुम थी तब तक खुद से मिलने का समय की कहां था मेरे पास...
ऑरकुट का दौर था वह... तुम्हारी स्क्रैपबुक के सहारे ही कुछ दिन बिताए... लेकिन कब तक उन बातों को पढ़कर खुश रखने की कोशिश करता जिनका मुझसे कोई सरोकार नहीं था। जिस दौर में टेक्स्ट मैसेज लिखने में तुम्हारे नाम का एक अक्षर लिखने के लिए 7 को 4 बार दबाना पड़ता हो, उस दौर में आखिर कोई अनजान बन चुके इंसान से कब तक ख्यालों में मिलने की कोशिश करता।
तुम्हें पता है, आज लोग मुझसे पूछते हैं कि आखिर तुम मुझसे दूर क्यों गई? कोई जवाब नहीं है मेरे पास इस बात का... तुमने कभी बताया ही नहीं... मैं मानता हूं कि तुमसे दूर जाने का निर्णय मेरा था लेकिन उस निर्णय की वजह तुम ही थी... मजबूरी थी मेरी...वक्त की हकीकत ने हालातों को भी बदल डाला था... शायद तुम्हें मजबूरी शब्द बेईमानी लगे लेकिन उस वक्त को और कोई नाम देना भी बेईमानी ही होगी...
#क्वीन
#क्वीन
Monday, July 11, 2016
वे 7 मिनट
याद है ना तुमको, पूरे डेढ़ साल बाद मिले थे हम उस दिन... लेकिन सब बदला बदला सा था...सिर्फ 12 शब्दों का संवाद था हमारा...उसके बाद 7 मिनट तक मैं उस शख्स को खोजता रहा जिससे मुझे मोहब्बत हुई थी...ओह याद आया तुम्हारे लिए वह मोहब्बत ही कहाँ थी। बीते लम्हों को एक बार फिर से तुम्हारे साथ उन 7 मिनटों में ही तो जिया था। पर मुझे ज्यादा ख़ुशी होती अगर तुममें तब भी वही पुरानी वाली चुलबुली सी लड़की अपनी जिंदगी जी रही होती जिससे मैंने मुहब्बत थी।
हां, फिर से मैं उसी तरह से 7 मिनट तक तुम्हारी आँखों को देखता रहा जैसे पहले देखा करता था। तुम खुश थी, तुम्हारी उन आँखों में कुछ खोने का दर्द भी नहीं था...बस इसी का तो कायल था मैं...हर हालात में खुश रहना...अंतर इतना सा है कि पहले की तरह ही मैं उस ख़ुशी की कीमत के बारे में सोच लेता हूँ।
अंदाजा लगाओ तुम्हारे सामने खड़े होकर बिताए गए उन 7 मिनटों के सहारे मैं कितना समय बिता सकता हूँ? 7 और मिनट या 7 घंटे या 7 दिन या 7 महीने या 7 साल या पूरी ज़िन्दगी?
उन सात मिनटों के सहारे तो मैं 7 जन्म बिता सकता हूँ...लेकिन अगर उन 7 जन्मों में तुम मेरे साथ होती तो बात ही कुछ और होती।
#क्वीन
हां, फिर से मैं उसी तरह से 7 मिनट तक तुम्हारी आँखों को देखता रहा जैसे पहले देखा करता था। तुम खुश थी, तुम्हारी उन आँखों में कुछ खोने का दर्द भी नहीं था...बस इसी का तो कायल था मैं...हर हालात में खुश रहना...अंतर इतना सा है कि पहले की तरह ही मैं उस ख़ुशी की कीमत के बारे में सोच लेता हूँ।
अंदाजा लगाओ तुम्हारे सामने खड़े होकर बिताए गए उन 7 मिनटों के सहारे मैं कितना समय बिता सकता हूँ? 7 और मिनट या 7 घंटे या 7 दिन या 7 महीने या 7 साल या पूरी ज़िन्दगी?
उन सात मिनटों के सहारे तो मैं 7 जन्म बिता सकता हूँ...लेकिन अगर उन 7 जन्मों में तुम मेरे साथ होती तो बात ही कुछ और होती।
#क्वीन
तुम्हारी वह मुस्कुराहट
लंबे समय तक तुम्हारा जिक्र करना बंद कर दिया... जिंदगी के हर हिस्से से तुम्हें गायब करने की कोशिश की लेकिन तुम्हारी फिक्र करना कभी नहीं छोड़ पाया... वह मेरे हाथ में नहीं था ना... तुमसे जुड़ी हर बात पता रहती थी मुझे...
याद है तुम्हें 7 महीन के बाद मैंने एक दिन शाम को तुम्हें कॉल किया था... हां, उसी दिन जब तुम्हारी मां की तबियत खराब थी और तुम अपना रूम बंद करके बहुत रोई थी... नहीं रोक पाया था खुद को तुम्हें कॉल करने से... मुझे पता था कि तुम्हारे लिए मेरी कॉल का बहुत महत्व है, तुम अपनी बातें किसी से शेयर नहीं करती थी... पर अपने दिल से कोई कैसे कुछ छिपा सकता है....
13 मिनट 40 सेकंड की उस कॉल के दौरान तुमने कई बार मुझसे पूछा कि आखिर मुझे यह बात पता कैसे लगी कि तुम रोई हो... मैं नहीं बता सकता था, क्योंकि यह बात मुझे किसी ने बताई ही नहीं थी...
13 मिनट 40 सेकंड की उस कॉल के दौरान तुमने कई बार मुझसे पूछा कि आखिर मुझे यह बात पता कैसे लगी कि तुम रोई हो... मैं नहीं बता सकता था, क्योंकि यह बात मुझे किसी ने बताई ही नहीं थी...
जानती हो उसदिन क्या हुआ था? मैं अपने घर से निकला और अचानक मेरे दिल ने कहा कि मुझे तुमसे बात करनी चाहिए... बस मैंने कॉल लगा दिया.... लेकिन क्या इससे पहले मेरे दिल ने 7 महीनों तक एक बार भी यह नहीं कहा कि मुझे तुमसे बात नहीं करनी चाहिए... इसका जवाब 'नहीं' है... मैंने कहा था ना कि मैं तुम्हारी खुशी में भले ही तुम्हारे साथ खड़ा न दिखूं लेकिन तुम्हारे आंसुओं को पोंछने सबसे पहले मैं ही आउंगा... मेरे बात करने के बाद तुम्हारे चेहरे पर 2 पलों के लिए जो मुस्कुराहट आई थी, उसी के लिए तो आज भी 'सब-कुछ' कर रहा हूं मैं...
#क्वीन
#क्वीन
Sunday, July 10, 2016
एक पुराना पत्र
अवाचित पत्र मेरे जो कल तलक खोले नहीं तुमने
समूचा विश्व उनको पढ़ रहा है तुमको सूचित हो...!!
#साभार #क्वीन #पुराने_पत्र
समूचा विश्व उनको पढ़ रहा है तुमको सूचित हो...!!
#साभार #क्वीन #पुराने_पत्र
Saturday, July 9, 2016
बहुत खास थी तुम
4-5 दिन में सिर्फ 1-2 बार बात होती थी हमारी, मेसेज से भी दिन में 5-10 मिनट ही बात होती थी। महीने में 1-2 बार बड़ी मुश्किल से मिल पाते थे हम... ऐसा नहीं था कि हम में से किसी पर भी बंदिशें थीं, तुम तो चाहती भी थी कि दिन भर बात करती रहो लेकिन मैं... मैं ही तुमसे बात करने का टाइम नहीं निकाल पाता था... कुछ तो व्यस्तताएं थीं और दूसरी बात यह कि मेरे पास बातें भी नहीं होती थीं.. जीवन में कुछ ऐसा था ही नहीं जिसे शेयर करने के लिए किसी 'खास' शक्स की जरूरत हो... सब कुछ तो दुनिया के सामने था... जिंदगी का हर हिस्सा सार्वजनिक था...जितना समय तुम्हारे साथ बिताता था बस वही 'खास' होता था और वह समय भी बस तुम्हारी मासूमियत को महसूस करने में ही निकल जाता था।
पर उस दिन जब तुम मुझसे दूर गई तो उसके बाद जो खुद की हकीकत मेरे सामने आई, उसने तो हालात ही बदल दिए... एक ही दिन में ऐसा लगा कि सब बदल गया... जिसके पास बात करने के लिए 'बात' नहीं होती थी, वह इंसान टूटता जा रहा था... वह चाहता था कि अपने मन की उथल-पुथल किसी से शेयर करे... एक छोटे से फैसले ने सब-कुछ बदल दिया था... और तुम्हें पता है, वह आज भी हजारों बातों को अपने दिल में दबाकर बैठा है... वह चाहता है कि उन बातों को किसी से शेयर करे पर उसके पास ऐसा कोई इंसान नहीं है... वह जानता है कि तुम भी यह बात जानती हो लेकिन वह अब तुम्हें अपनी जिंदगी में वापस नहीं लाना चाहता..वह तो बस तुमको बताना चाहता है कि तुम उसे लिए बहुत 'खास' थी... यही समझाने की कोशिश में तो उसने कई साल बिता दिए थे...
#क्वीन
#क्वीन
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