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Monday, August 15, 2016

लव नहीं, प्रेम लिखता हूं...

तुमसे मेरी बात नहीं होती थी क्योंकि मेरे पास तुमसे बात करने का कोई बहाना ही नहीं था। फिर उस दिन तुम्हारे हाथ में वह अंग्रेजी 'नॉवल' देखी। मुझे तब तक नहीं पता था कि अंग्रेजी में लिखी गईं प्रेम कहानियां कैसी होती हैं। बहुत हिम्मत करके तुमसे पहली बार बात की और कहा, 'प्लीज मुझे यह नॉवल दे दो, मैंने इसके बारे में बहुत सुना है लेकिन कहीं मिली नहीं।' मुझे तो यह भी नहीं पता था कि उस नॉवल को लिखा किसने है और तुम्हें एक सच और बताऊं मुझे आज भी नहीं पता कि वह नॉवल किसने लिखी थी। तुमने 2 दिन बाद मुझे उस नॉवल को देने का वादा किया और चली गई।

उस नॉवेल के शुरुआती 4 पेज पढ़ने के बाद मैं उसे आगे नहीं पढ़ सका क्योंकि उसमें प्रेम जैसा तो कुछ था ही नहीं। मैंने को श्रीराम और श्रीकृष्ण को पढ़ा था। मैंने तो यह पढ़ा था कि प्रेम ईश्वर का रूप होता है और इसी कारण जब मिथिला के बगीचे में श्रीराम और मां सीता ने एक-दूसरे को पहली बार देखा तो उनके मन में प्रेम प्रकट हुआ। अब प्रकट तो ईश्वर ही हो सकते हैं ना। लेकिन जब उस नॉवल में पढ़ा कि नायक 'fall in love with' नायिका, तो समझ में नहीं आया कि आखिर ये 'लव' में गिरा क्यों? धीरे-धीरे जब अंग्रेजी लव का प्रत्यक्ष रूप देखा, जो फेसबुक की प्रोफाइल पिक्चर देखकर शुरू होता था और चंद महीनों में बिस्तर तक आकर खत्म हो जाता था तो समझ में आया कि गिरी हुई हरकतों वाला 'लव' हमारे ईश्वरीय 'प्रेम' के सामने कहीं नहीं टिकता...

बस तभी से तय किया कि 'लव' नहीं प्रेम लिखूंगा... वह प्रेम जो मां गंगा के जल की भांति शाश्वत, निर्मल, निच्छल, पावन एवं पवित्र होता है। शारीरिक सुन्दरता के जाल में फंसकर कभी प्रेम नहीं होता उसे वासना कहा जाता है...वासना शरीर का मिलन है परन्तु प्रेम आत्मा का मिलन है...
#क्वीन

तकदीर जुल्फों की तरह नहीं होती

हां, उस दिन भी 15 अगस्त ही था जब तुम उस मंदिर के बाहर स्कूल तक साथ चलने के लिए मेरा इंतजार कर रही थी। मुझे तुम्हारे पास देरी से पहुंचना बहुत बुरा लगता था लेकिन क्या करता, सड़क पर चलने वाली बड़ी गाड़ियों ने मेरी छोटी सी बाइक को 'फंसा' लिया था। तुम चाहती थी कि कम से कम हम साथ चलकर कुछ पल एक साथ बिताएं लेकिन हमें उन पलों में छोटी सी कटौती करनी पड़ी। मैंने मंदिर के बाहर अपनी बाइक खड़ी की और फिर हम पैदल स्कूल की ओर जाने लगे। कई महीनों के बाद तुम्हारे साथ अकेले 10 मिनट बिताने का समय मिला था। उन 10 मिनटों में आजादी के उस दिन को बेहद खास तरीके से मनाया था हमने। ख्वाब बनाया था तुमने मुझे और मैं तुम्हारा साया बनने की कोशिश में था।

पता है समस्या क्या है? समस्या यह है कि परिंदे सोचते हैं कि रहने को घर मिले और इंसान सोचता है कि उड़ने को पर मिलें। तुम भी उड़ना चाहती थी लेकिन तुम भूल गई कि तकदीर जुल्फों की तरह नहीं होती, जिसे बिखरने पर संवार लिया जाए।
#क्वीन

Saturday, August 13, 2016

जिंदगी की कुछ मजबूरियां...

लोग कहते हैं कि "मुश्किल वक्त" दुनिया का सबसे बड़ा जादूगर होता है जो एक पल में आपके चाहने वालों के चेहरे से नकाब हटा देता है लेकिन तुम्हारे चेहरे से तो नकाब तब हटा जब मैं अपने मुश्किल दौर से बाहर निकल चुका था। मतलबी दुनिया में भी तुम मेरी बातों के मतलब को नहीं समझ पाई। तुम समझने की कोशिश करती भी कैसे आखिर तुम्हारी अपनी जिंदगी थी, तुम्हारे अपने सपने थे... तुम अपने सपनों को तोड़कर मेरी हमसफर कैसे बनती... तुम्हारे बदल जाने का मुझे कोई दुख नहीं लेकिन एक बार सोचकर देखो कि जिनके लिए तुम्हारी पहचान मैं था, उनसे नजरें कैसे मिलाऊं...

क्या उनसे यह कह दूं कि जिसके लिए मैं रोता हूं, वह किसी और को खुश रखने में व्यस्त है...खैर मैं बस इस बात से खुद को तसल्ली दे देता हूं कि "जिंदगी में कुछ मजबूरियां" मोहब्बत से ज्यादा ताकतवर होती हैं जिनकी वजह से ना चाहते हुए भी साथ छोड़ना ही पड़ता है। हम अपने रिश्तों के लिए वक़्त नहीं निकाल पा रहे थे और फिर वक़्त ने अपनी चाल चली और हमारे बीच से रिश्ता ही निकाल दिया। अगर कभी मौका मिला तो कुछ पल उन दिनों का ज़िक्र करेंगे, जब तुम मेरे और मैं तुम्हारा हुआ करता था....
#क्वीन

मेरी कामना

मैं जानता हूं कि तुम बहुत ऊपर जाना चाहती हो, तुम्हारे सपने बहुत बड़े हैं लेकिन ऐसी बुलंदियां भी किस काम की जहां तुम तो ऊपर पहुंच जाओ लेकिन मोहब्बत नीचे उतर जाए। तुम्हारे उस 'प्रतिबिम्ब' से मोहब्बत हुई थी मुझे, काश! वह वास्तविक होता। इस 'काश' से कुछ ख्वाब जुड़े थे जो यकीं से परे और हकीकत से कोसों दूर थे। पत्थर से भी कठोर और पानी से भी कोमल उन ख्वाबों से जुड़े किस्से आज मशहूर होते जा रहे हैं लेकिन वह 'काश' एक सुनहरी शाम की तरह ढ़लता जा रहा है।  जिंदगी ने मुझे दुखी होने का सिर्फ एक कारण दिया और वह था तुमसे दूरी लेकिन इसके साथ ही तुमने मुझे मुस्कुराने के जो हजारों कारण दिए थे क्या उनका कोई मोल नहीं था? देखो, आज मैंने जिन्दगी के उस कारण को हरा दिया। और ये मैंने अकेले नहीं किया बल्कि तुमने मेरा पूरा साथ दिया। आखिर तुम थी ही इतनी खास, तुम्हारी वो नाराजगी जो चंद पलों में प्यार को दोगुना कर देती है, तुम्हारी तो मुस्कुराहट जो मेरे हर दुख को भूल जाने पर मजबूर कर देती थी। तुमसे जुड़ी हर एक चीज जिसे हर रात मैं घंटो निहारा करता था।

तुम मेरे पास होकर मुझसे क्या चाहती थी, यह मुझे नहीं पता लेकिन मैं बस तुम्हारे साथ बिताए गए हर एक पल हो एक सुनहरे सपने की तरह जीना चाहता था... एक ऐसा सपना जिसका कभी अंत न हो, जो कभी न टूटे लेकिन सत्य यह है कि मेरी यह कामना अवैज्ञानिक भी थी और अर्थहीन भी...
#क्वीन

और बेहतर की उम्मीद में...

एक बार दो दोस्त एक बगीचे में गए, वहां के माली ने दोनों से कहा कि जाओ और इस बगीचे से सबसे खुशबूदार और सुन्दर फूल खोजकर लाओ लेकिन शर्त यह है कि जिस फूल को तुम एक बार नकार चुके हो उसे दुबारा नहीं छू सकते और फूल लेकर आने की अनिवार्यता है। दोनों दोस्तों में से एक ने बगीचे के अंदर घुसते ही एक सुन्दर सा फूल चुना और वापस आ गया। दूसरे लड़के ने कई फूल चेक किए लेकिन 'आगे और भी बेहतर मिलेंगे' की उम्मीद के साथ आगे बढ़ता गया। 2 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद वह एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंच गया और आखिरी फूल जो कुछ खास नहीं था, उसे लेकर पछताते हुए वापस आ गया।

ऐसा ही कुछ हमारी जिंदगी में भी होता है। कभी-कभी हम और ज्यादा बेहतर पाने की तमन्ना में बेहतरीन को भी खो देते हैं। अब तुम खुद तय कर लो कि तुम किस रास्ते पर हो। रही बात मेरी तो मैंने जो फूल चुना था, उसमें तो कोई कमी नहीं थी लेकिन मैं भूल गया कि कुछ फूल डालियों पर ही अच्छे लगते हैं। खैर, उस फूल के साथ बिताया गया कुछ समय मेरे लिए बेहद खास था और अब मैं किसी फूल को डाली से तोड़कर उसकी 'हत्या' का पाप अपने सर लेने की स्थिति में भी नहीं हूं...
#क्वीन

हो सकता है तुमको यह गलत लगे...


आखिर क्यों लिखता हूं तुम्हें, क्या इसलिए कि लोग कहें कि अरे देखो, गौरव की मोहब्बत तो लाजवाब है? या फिर इसलिए कि लोग मेरे दर्द पर वाह-वाह करें। नहीं! इनमें से कोई कारण नहीं है। फिर सच क्या है? शायद मुश्किल हो तुम्हारे लिए लेकिन सच यह है कि मैंने अपनी मां को बचाने के लिए अपनी भावनाओं का बाजार लगा दिया। और अपनी मां के लिए ही तुम्हें भी अपने सपने में शामिल कर लिया। शायद तुम्हें ये गलत या बुरा लगे लेकिन यही सच है।

क्या सच्ची मोहब्बत के पैमाने किसी भाषा पर आधारित होते हैं। क्या मोहब्बत 'Never Love a Stranger' जैसी चीजें लिखने से ही सच्ची मानी जाएगी। नहीं, मोहब्बत की असली भाषा तो हिंदी है क्योंकि इसमें रिश्ते हैं, रिश्तों में मर्यादा है, मर्यादा में विश्वास है, विश्वास में प्रेम है और प्रेम में संमृद्धता है। अब अगर दुनिया यह मानती है कि मैं गलत कह रहा हूं तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन अगर मेरे भाई बहन ही इसे गलत मान लेंगे तो मेरी जिम्मेदारी है कि मां के अस्तिव को बचाने के लिए, मां की वास्तविकता से उनका परिचय कराने के लिए इन विषयों को प्रमाणित करूं। बस मैं अपनी जिम्मेदारी निभा रहा हूं.... और इसीलिए मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगा जब उस लड़के ने कहा कि वह मेरी फेसबुक पोस्ट्स का अंग्रेजी में अनुवाद करेगा।
#क्वीन

Friday, August 12, 2016

क्या मुझे इस बात पर खुश होना चाहिए?

पता है, आज मेट्रो में एक लड़का मिला। मुझे घूरने की अवस्था में पहले तो वह 10-15 मिनट खड़ा रहै और फिर अचानक मेरे पास आकर बोला कि सर, आप विश्व गौरव हैं ना? मैंने भी 'हां' में जवाब देते हुए पूछ लिया कि लेकिन भाई, कैसे जानते हो मुझे? उसने कहा कि सर, मैं आपसे फेसबुक पर और अपनी #क्वीन के बारे में फेसबुक पर जो भी लिखते हैं, उसका अंग्रेजी में ट्रांसलेट करके एक संकलन जैसा कुछ तैयार कर रहा हूं। तब मुझे ध्यान में आया कि फैजल सलीम नामक उस लड़के ने ही शायद मुझे पिछले महीने मेसेज करके कहा था कि मैं अपनी #क्वीन से जुड़ी फेसबुक पोस्ट्स की एक किताब छपवाऊं।

उसने तुम्हारी तारीफ में और भी बहुत कुछ कहा। मुझे अच्छा लगा कि कम से कम मेरी कलम में इतनी ताकत तो है कि तुमको भी लोग 'पसंद' करने लगे हैं। उसके मुताबिक तुम दुनिया की सबसे खुशनसीब लड़की हो क्यों कि जो इंसान तुम्हें प्यार करता है, उस इंसान के प्रेम पर वे लोग भी प्रश्नचिन्ह नहीं लगा पा रहे जो उसे जानते तक नहीं। वैसे मुझे भी इस बात का गुरुर है कि मैं तुमसे प्यार करता हूं। बहुत कीमती चीज है प्यार मेरे लिए और इसी कारण मैं भी यही मानता हूं कि तुम वाकई में खुशनसीब हो कि मैं तुम्हें चाहता हूं। ये मेरा अहंकार नहीं बल्कि मेरे प्रेम की पवित्रता पर विश्वास है।

लेकिन एक बात बताओ तो जरा कि क्या तुमसे जुड़ी पोस्ट का अनुवाद करने वाली बात को लेकर मुझे खुश होना चाहिए? क्या मुझे गर्व होना चाहिए कि मेरी कलम से जो लिखा गया उसका ट्रांसलेशन करके लोग उसे छपवाने की बात कर रहे हैं? मैं क्या सोचता हूं, वह कल बताउंगा लेकिन तुमसे जानने की इच्छा जरूर है।