एक बार दो दोस्त एक बगीचे में गए, वहां के माली ने दोनों से कहा कि जाओ और इस बगीचे से सबसे खुशबूदार और सुन्दर फूल खोजकर लाओ लेकिन शर्त यह है कि जिस फूल को तुम एक बार नकार चुके हो उसे दुबारा नहीं छू सकते और फूल लेकर आने की अनिवार्यता है। दोनों दोस्तों में से एक ने बगीचे के अंदर घुसते ही एक सुन्दर सा फूल चुना और वापस आ गया। दूसरे लड़के ने कई फूल चेक किए लेकिन 'आगे और भी बेहतर मिलेंगे' की उम्मीद के साथ आगे बढ़ता गया। 2 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद वह एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंच गया और आखिरी फूल जो कुछ खास नहीं था, उसे लेकर पछताते हुए वापस आ गया।
ऐसा ही कुछ हमारी जिंदगी में भी होता है। कभी-कभी हम और ज्यादा बेहतर पाने की तमन्ना में बेहतरीन को भी खो देते हैं। अब तुम खुद तय कर लो कि तुम किस रास्ते पर हो। रही बात मेरी तो मैंने जो फूल चुना था, उसमें तो कोई कमी नहीं थी लेकिन मैं भूल गया कि कुछ फूल डालियों पर ही अच्छे लगते हैं। खैर, उस फूल के साथ बिताया गया कुछ समय मेरे लिए बेहद खास था और अब मैं किसी फूल को डाली से तोड़कर उसकी 'हत्या' का पाप अपने सर लेने की स्थिति में भी नहीं हूं...
#क्वीन
'क्वीन' कौन है? इस सवाल का जवाब तो मैं भी खोज रहा हूं। मैं तो बस इतना जानता हूं कि यह सामान्य को विशिष्ट बनाने का एक प्रयास है... कोई अलंकार नहीं... सिर्फ सच्ची भावनाएं... तुम थी तो सब कुछ था... तुम नहीं हो तो भी सब कुछ है....लेकिन तब वह 'सब कुछ' अच्छा लगता था लेकिन अब.... #क्वीन
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