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Monday, July 18, 2016

और उस दिन...

उस दिन जा रही थी तुम... मुझे नहीं पता था कि तुमसे दोबारा कभी मुलाकात होगी भी या नहीं... चंद कदमों की दूरी पर था मैं तुमसे... तुमने तो शायद मुझे देखा भी नहीं था...एक पल को लगा कि जैसे सब कुछ हार गया हूं लेकिन... तुम्हारे 'लेकिन' की तरह ही मेरा भी एक लेकिन था लेकिन मेरा 'लेकिन' तुम्हारे लेकिन की तरह अवसादों में फंसा हुआ नहीं था... अगर उस दिन मैं खुद को हारा हुआ मान लेता तो मेरा 'लेकिन' भी तुम्हारे लेकिन की तरह ही हो जाता... हो सकता है कि तुमको या तुमसे जुड़े लोगों को लगता हो कि मैं हार गया लेकिन जहां से मैं देख रहा था वहां से सिर्फ मैं जीता था... क्योंकि जहां से मैं देख रहा था वहां से मुझे एक मासूम सी लड़की अपनी तथाकथित मासूमियत का दिखावा करते हुए उस इंसान से दूर जा रही थी जो दुनिया में उससे सबसे ज्यादा मोहब्बत करता था... वह एक ऐसे इंसान से दूर जा रही थी जिसने कभी तुमसे उस रिश्ते का नाम तक नहीं पूछा जो बेनामी की पराकाष्ठा को पार कर चुका था... उसे तो बस अपनी हर एक दुआ में तुम्हारी खुशी मांगने की आदत पड़ गई थी...कुछ पाने की चाहत में किसी 'अपने' से दूर जाना समर्पण, निष्ठा या लक्ष्य नहीं बल्कि खुदगर्जी कहलाता है...
पता नहीं तुम्हें कभी मेरी उस मोहब्बत का एहसास होगा या नहीं लेकिन मैं बस इतना जानता हूं कि अगर अब तुम कभी वापस आओगी भी तो भी तुम्हें कुछ हासिल नहीं होगा क्योंकि वह मोहब्बत तो कब की फासलों में फना हो गई...एक गलती मेरी भी थी... मैंने भी सफर-ए-जिंदगी में सिर्फ तुम्हारे लिए उनको भी नजरंदाज किया जो हासिल थे...
‪#‎क्वीन‬

Friday, July 15, 2016

चेहरे के रंग


और उस दिन मेरे एक दोस्त ने शाम को मुझे कॉल किया, उसने मुझसे कहा कि वह मिलना चाहता है...मेरे पास उस समय बाइक नहीं थी तो मैंने कहा कि मैं थोड़ी देर में आता हूं... फिर देर शाम उसने कॉल करके कहा कि तुम मुझे बुला रही हो... मुझे पता था कि तुम मुझे बुलाने के लिए किसी और से तो नहीं कह सकती... खैर, मेरा छोटा भाई बाइक लेकर दीदी के घर पर गया हुआ था... मैंने उसे तत्काल वापस बुलाया और बाइक लेकर मार्केट पहुंचा... उम्मीद के मुताबिक तुम तो वहां नहीं थी लेकिन मेरा दोस्त मुझे देखकर मुस्कुरा रहा था...

उसे लग रहा था कि मैं तुम्हारे लिए आया हूं लेकिन सच तो यही था कि उस दिन अगर वह तुम्हारा नाम नहीं लेता तो भी मैं कुछ देर के बाद नियत स्थान पर जाता... तुमसे मिलने नहीं, बस उस जगह पर तुम्हें महसूस करने जहां तुम रोज जाती थी...

और जब अगले दिन मैंने तुम्हें बताया कि लोग अब तुम्हारा नाम लेकर मुझे मिलने बुलाने लगे हैं तो पूरे 21 मिनट तक तुमने मुझसे झगड़ा किया था... मैंने किसी को नहीं बताया था कि मैं तुमसे प्यार करता हूं लेकिन चेहरे के रंग को कैसे छिपाता... जो लोग बहुत करीब थे उन्हें पता लग ही गया था... बस दुख इस बात का है कि उन लोगों को समझ में आ गया तो वे फायदा उठाने लगे और तुमने उस बात को समझने की कोशिश ही नहीं की...
#क्वीन

Wednesday, July 13, 2016

लेकिन के मायने

कैसा रिश्ता था हमारा और कैसे थे हम... जब भी किसी 'छोटी' सी बात पर नाराज होकर झगड़ा करते थे तो 'मुझे मेसेज मत करो', 'मुझसे बात मत करो' जैसी बातें बोलकर ही घंटों बात कर लिया करते थे... और फिर जब सोने का समय हो जाए तो सब कुछ भूलकर फिर से सब नॉर्मल कर देते थे... तुमको पता है हम दोनों की सबसे अच्छी बात क्या थी? हम दोनों सिर्फ एक-दूसरे को चाहते थे, हमने एक-दूसरे से कभी कुछ नहीं चाहा... अपनी जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीकर कब हम दोनों हम से 'मैं-तुम' हो गए... तुम वह सब करने लगी जो तुम्हें अच्छा लगता था और मैं तो वह करता ही था जो मुझे पसंद था... हममें से किसी ने एक-दूसरे के लिए खुद को नहीं बदला.. आखिर बदलते भी क्यों? मोहब्बत में शर्तें कहां होती थीं...

एक बात जो मुझे हमेशा परेशान करती थी, जानती हो वह क्या थी? मैं जो करता था उससे किसी न किसी का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष फायदा जरूर होता था लेकिन तुम जो करती थी उससे सिर्फ तुम्हारे भविष्य का नुकसान था... इसमें परेशान करने वाली बात यह थी कि तुम सब कुछ जानते हुए भी वही करती जा रही थी जो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं था... तुम कहती भी थी कि हां गौरव, मैं जानती हूं कि यह मेरे लिए ठीक नहीं लेकिन... इस लेकिन के आगे तुमने कभी कुछ नहीं बताया... 'लेकिन' के मायने कितने बड़े होते हैं यह तुम्हारे उस 'लेकिन' ने ही बताया था...
‪#‎क्वीन‬

वह खौफनाक सुबह

रात का 1 बजा था उस दिन, पूरे 7 दिनों से हमारी बात नहीं हुई थी... मैंने घर पहुंचते ही तुम्हें कॉल लगाया... शायद तुम मेरे कॉल का ही इंतजार कर रही थी। बेहद नाराज थी उस दिन तुम कि आखिर मैंने 7 दिनों से बात क्यों नहीं की... एक साथ 6 सवाल पूछ डाले तुमने... मेरे पास उन सवालों का कोई जवाब नहीं था, या फिर यूं समझ लो कि मैं तुम्हारे उन सवालों के जवाब देना ही नहीं चाहता था। ऐसा क्यों था इस बात का जवाब तो आज भी नहीं दे सकता... 

खैर, उस रात के आगोश में डूबकर तुम जिस तरह से धीमी आवाज में बात कर रही थी, वैसी आवाज मैंने कभी नहीं सुनी थी... उस आवाज में प्रेम और डर का अनूठा संगम झलक रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे तुम किसी ऐसे खौफनाक सपने में हो जिसमें तुम अपना सब कुछ खोने वाली हो और उसे बचाने का तुम्हें कोई रास्ता नहीं मिल रहा। 

पता है, मोहब्बत गहरी हो या ना हो लेकिन विश्वास गहरा होना चाहिए... कुछ मिनट तक तुम्हारी उस आवाज के दर्द को महसूस किया और फिर अचानक तुमने फोन काट दिया...अगले दिन तुम जब मिली तो इतना ही बोली, 'गौरव, 'खुशबू' की तरह हूं मैं, जब तक हूं तब तक मुझे महसूस करो...स्थायित्व आ गया तो मेरा अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।'
तुमने ऐसा क्यों कहा? यह भी उन सवालों में एक है जिनका जवाब आज तक नहीं मिला....
#क्वीन

Tuesday, July 12, 2016

मजबूरी थी वह मेरी...

तुमसे दूर जाने के बाद भी मन में एक उम्मीद थी कि कभी तो तुम संपर्क साधने की कोशिश करोगी ही लेकिन तुमने ऐसा कुछ नहीं किया। ख्वाहिशें तो हजारों थीं लेकिन तुम जरूरत बनती जा रही थी... एक दौर ऐसा भी आया जब तन्हाइयों में जीना थोड़ा मुश्किल सा लगने लगा लेकिन असल मायनों में तो वह दौर मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था। उसी दौर में तो खुद से मुलाकात हुई थी मेरी... जब तक तुम थी तब तक खुद से मिलने का समय की कहां था मेरे पास...
ऑरकुट का दौर था वह... तुम्हारी स्क्रैपबुक के सहारे ही कुछ दिन बिताए... लेकिन कब तक उन बातों को पढ़कर खुश रखने की कोशिश करता जिनका मुझसे कोई सरोकार नहीं था। जिस दौर में टेक्स्ट मैसेज लिखने में तुम्हारे नाम का एक अक्षर लिखने के लिए 7 को 4 बार दबाना पड़ता हो, उस दौर में आखिर कोई अनजान बन चुके इंसान से कब तक ख्यालों में मिलने की कोशिश करता।
तुम्हें पता है, आज लोग मुझसे पूछते हैं कि आखिर तुम मुझसे दूर क्यों गई? कोई जवाब नहीं है मेरे पास इस बात का... तुमने कभी बताया ही नहीं... मैं मानता हूं कि तुमसे दूर जाने का निर्णय मेरा था लेकिन उस निर्णय की वजह तुम ही थी... मजबूरी थी मेरी...वक्त की हकीकत ने हालातों को भी बदल डाला था... शायद तुम्हें मजबूरी शब्द बेईमानी लगे लेकिन उस वक्त को और कोई नाम देना भी बेईमानी ही होगी...
‪#‎क्वीन‬

Monday, July 11, 2016

वे 7 मिनट

याद है ना तुमको, पूरे डेढ़ साल बाद मिले थे हम उस दिन... लेकिन सब बदला बदला सा था...सिर्फ 12 शब्दों का संवाद था हमारा...उसके बाद 7 मिनट तक मैं उस शख्स को खोजता रहा जिससे मुझे मोहब्बत हुई थी...ओह याद आया तुम्हारे लिए वह मोहब्बत ही कहाँ थी। बीते लम्हों को एक बार फिर से तुम्हारे साथ उन 7 मिनटों में ही तो जिया था। पर मुझे ज्यादा ख़ुशी होती अगर तुममें तब भी वही पुरानी वाली चुलबुली सी लड़की अपनी जिंदगी जी रही होती जिससे मैंने मुहब्बत थी।

हां, फिर से मैं उसी तरह से 7 मिनट तक तुम्हारी आँखों को देखता रहा जैसे पहले देखा करता था। तुम खुश थी, तुम्हारी उन आँखों में कुछ खोने का दर्द भी नहीं था...बस इसी का तो कायल था मैं...हर हालात में खुश रहना...अंतर इतना सा है कि पहले की तरह ही मैं उस ख़ुशी की कीमत के बारे में सोच लेता हूँ।

अंदाजा लगाओ तुम्हारे सामने खड़े होकर बिताए गए उन 7 मिनटों के सहारे मैं कितना समय बिता सकता हूँ? 7 और मिनट या 7 घंटे या 7 दिन या 7 महीने या 7 साल या पूरी ज़िन्दगी?


उन सात मिनटों के सहारे तो मैं 7 जन्म बिता सकता हूँ...लेकिन अगर उन 7 जन्मों में तुम मेरे साथ होती तो बात ही कुछ और होती।
‪#‎क्वीन‬

तुम्हारी वह मुस्कुराहट

लंबे समय तक तुम्हारा जिक्र करना बंद कर दिया... जिंदगी के हर हिस्से से तुम्हें गायब करने की कोशिश की लेकिन तुम्हारी फिक्र करना कभी नहीं छोड़ पाया... वह मेरे हाथ में नहीं था ना... तुमसे जुड़ी हर बात पता रहती थी मुझे...
याद है तुम्हें 7 महीन के बाद मैंने एक दिन शाम को तुम्हें कॉल किया था... हां, उसी दिन जब तुम्हारी मां की तबियत खराब थी और तुम अपना रूम बंद करके बहुत रोई थी... नहीं रोक पाया था खुद को तुम्हें कॉल करने से... मुझे पता था कि तुम्हारे लिए मेरी कॉल का बहुत महत्व है, तुम अपनी बातें किसी से शेयर नहीं करती थी... पर अपने दिल से कोई कैसे कुछ छिपा सकता है....
13 मिनट 40 सेकंड की उस कॉल के दौरान तुमने कई बार मुझसे पूछा कि आखिर मुझे यह बात पता कैसे लगी कि तुम रोई हो... मैं नहीं बता सकता था, क्योंकि यह बात मुझे किसी ने बताई ही नहीं थी...
जानती हो उसदिन क्या हुआ था? मैं अपने घर से निकला और अचानक मेरे दिल ने कहा कि मुझे तुमसे बात करनी चाहिए... बस मैंने कॉल लगा दिया.... लेकिन क्या इससे पहले मेरे दिल ने 7 महीनों तक एक बार भी यह नहीं कहा कि मुझे तुमसे बात नहीं करनी चाहिए... इसका जवाब 'नहीं' है... मैंने कहा था ना कि मैं तुम्हारी खुशी में भले ही तुम्हारे साथ खड़ा न दिखूं लेकिन तुम्हारे आंसुओं को पोंछने सबसे पहले मैं ही आउंगा... मेरे बात करने के बाद तुम्हारे चेहरे पर 2 पलों के लिए जो मुस्कुराहट आई थी, उसी के लिए तो आज भी 'सब-कुछ' कर रहा हूं मैं...
‪#‎क्वीन‬